Batkahi Radiosakhi Mamta Singh ki

Saturday, October 10, 2015

स्‍मृतियों में मां....



आज का ही दिन था वो... शनिवार की उदास मनहूस दोपहर....सुबह से मन विकल था, ईश्‍वर से प्रार्थना कर रहा था....लौट जाए वक्‍त... ठहर जाये उस लम्‍हे पर.... जब मुंबई आयीं थीं मां.... मां फिर से एक बार स्‍वस्‍थ हो जाएं....लेकिन जाने वाले को कोई रोक नहीं सकता।

दोपहर के खाने का वक्‍त था, इलाहाबाद से भईया का फोन आया....'मां नहीं रहीं'....हाथ का निवाला आधे में रूक गया था। थाली यूं ही धरी रह गयी थी। सात महीने के नन्‍हे जादू किलकारी मार-मारकर मेरे आंसू पोंछ रहे थे....मां के अचानक चले जाने पर मन में ये हूक रह गयी काश...थोड़े दिन और रूकतीं.... काश उनकी मौजूदगी में जादू की पहली इलाहाबाद यात्रा हो जाती....काश जादू नानी का ढेर सारा वात्‍सल्‍य और प्‍यार पा लेता....काश जादू नानी का मतलब समझने लगता। ....वे एक खास लोकगीत जादू के लिए गाती थीं। उस लोकगीत की धुन थोड़ा और गूंजती रहती। काश थोड़े आर्शीवचन और दे जातीं....काश जिंदगी के थोड़े और पन्‍ने पढ़ा देतीं। मुश्किलों के कठिन पाठ के मायने समझा देतीं... काश मां थोड़े दिन और रूक जातीं....काश.....उनके अंतिम समय में हमें भी उनका साथ मिल जाता...काश..मेरे इंतज़ार में ठहरी उनकी आंखों की नमी को रोप लेते अपनी आंखों में.... काश मां का साथ थोड़ा और मिल जाता हमें।

चली गयी हैं मां। आसमान में चमकती हैं किसी तारे की तरह। मुश्किल की घड़ी में आज भी अपने आशीषों के साथ पीछे आ खड़ी होती हैं। मुड़ के देखो तो ग़ायब हो जाती हैं।

मैं भी मां बन गयी हूं1 लेकिन मां को याद कर आज भी खुद एक बच्‍ची बन जाती हूं। परेशानी की घड़ी में आज भी मां का वही आंचल ढूंढता है मन। बचपन के दिनों में जहां छुप कर हर कष्‍ट का निवारण हो जाता था। बचपन के उन दिनों को याद कर आज भी मन आर्द्र हो जाता है.... जब मां की एक थपकी से नींंद आती थी। अभी हाल ही की तो बात है जब जादू आने वाला था.. तो न जाने कितनी नसीहतें, ना जाने कितनी जानकारी दिया करती थीं मां फोन पर। जादू के जन्‍म की खबर सुनकर मां की आवाज़ में छलकता हुआ आह्लाद, खुशी, सुख का सागर आज भी मेरे मन में हिलोरें मांगता है। फिर धीरे से आंखों की कोरों से बहने लगता है दरिया की तरह....। आज भी जब इलाहाबाद जाते हैं तो घर के कोने-कोने में मां की छबि दिखायी देती है। अमूर्त रूप में मां नज़र आती हैं। घर के कोने-कोने से उनकी पुकार आज भी सुनायी देती है।

आज ही दिन मेरे पसंदीदा ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह ने भी इस फानी दुनिया को अलविदा कहा। नमन उन्‍हें भी। अपनी मां को विनम्र श्रद्धांजलि के रूप में स्‍मृतियों का सागर।